Bhooto Ki Kahani

Bhooto Ki Kahani 5 भूतों की कहानी जो आपको भी पसंद आने वाले हैं Horror Story

Bhooto ki kahani 5 भूतों की कहानी इस पोस्ट में आपको 5 भूतों की कहानी बताने वाला हूं जो आपको बहुत अच्छा लगेगा इस कहानी को में अपने दोस्त से सुना था और मुझे अच्छा भी लगा इसलिए मैं आपके साथ भी ये स्टोरी शेयर कर रहा हूं

जोकि आपको भी पसंद आने वाले हैं तो चलिए जानते हैं

5 Bhooto की कहानी – Bhooto Ki Kahani

एक गाव में एक बच्चा रहता था जिसका नाम था गोपाल उसके घर में वो और उसकी मा रहता था गोपाल को मिठाई खाना बहुत पसंद था और उसकी मा कभी कभी उसे मिठाई बना कर खिलाता था गोपाल स्कूल भी जाता था स्कूल में उसका एक दोस्त था जिसका नाम था सूरज दोनों एक साथ पढ़ाई करते थे खेलते थे और सभी जगह एक साथ घूमते रहते थे

एक बार गोपाल अपने दोस्त के साथ खेलने के बाद घर पर आकार देखा

कि उसकी मा ने उसके लिए बहुत अच्छा अच्छा मिठाई बनाया हैं

गोपाल सोचा के वो अपने दोस्त सूरज के साथ मिलकर दोनों एक साथ ये मिठाई खाएंगे,

यह सोच कर मिठाई को अपने साथ लिया गोपाल बहुत खुश था उसका मन पसंद मिठाई उसके मा ने जो

उसके लिया बनाया था और वह इन मिठाई को अपने दोस्त सूरज के साथ मिलकर मजे से खाने के लिए,

अपने दोस्त के घर की तरफ जाने लगा जाते जाते वो अपने आप में गाना गाने लगा

“एक को खाएंगे दूसरे को खाएंगे चुन चुन कर पांच को खाएंगे

एक को खाएंगे दूसरे को खाएंगे चुन चुन कर पांच को खाएंगे” इस तरह से गाना गा ते हुए चल रहे था

रास्ते में एक जगह पर 5 नारियल के पेड़ थे और उन पेड़ पर 5 भूत रहते थे जब उन 5 भूतों ने गोपाल की बात सुनी तो

Bhooto को लगा के वो लड़का उन 5 भूतों को खाने की बात कर रहा हैं

ऐसे में वह पांचों भूत डर गया और आपस में बात करने लगा के यह बच्चा तो हमें खाने की बात कर रहे हैं

अब हम इनसे अपना जान को कैसे बचाई ?

Bhooto ने प्लानिंग किया और उस गोपाल के सामने आया

Bhooto Ki Kahani
Bhooto Ki Kahani

और आकर कहां मालिक आप हमें खाइए नहीं हमारे जान को बस दीजिए इसके बदले में हम आपको एक

तोहफ़ा देंगे गोपाल तो Bhooto को देख कर ही डार गया था लेकिन जब उसने

Bhooto की तोहफ़ा की बात सुनी तो गोपाल के अंदर हिम्मत आया और गोपाल ने पूछा कैसा तोहफ़ा देंगे

भूतों ने अपने जादू से उन्हें एक हाँडी दिया गोपाल हाँडी देखकर बोला इस हाँडी को लेकर में क्या करू

सभी भूत ने कहा मालिक ये कोई मामूली हाँडी नहीं हैं ये तो जादुई हाँडी हैं और आपको जब भी

कुछ खाने को मान करें ताब आप हाँडी को बोलिए हाँडी आपको तुरंत वह सब दे देंगे

ये सून कर गोपाल ने हाँडी से कहा की मुझे खीर खाना हैं ये हाँडी मुझे खीर दीजिए

ये कहने के बाद हाँडी से तुरंत खीर निकाल आया ये देख कर

गोपाल तो बहुत खुश हो गया और भूत से कहा ठीक हैं में आपको नहीं खाऊंगा,

गोपाल की मुंह से ये बात सुनकर सभी भूत खुश हो गया

फिर सब भूत नारियल के पेड़ पर चले गया और गोपाल हाँडी लेकर सोचा

चलो इतनी अच्छी चीज मेरे दोस्त सूरज को भी दिखाते हैं वो भी

खुश हो जाएगा ये कहकर सूरज के घर के तरफ

गोपाल जाने लगा जाते जाते सूरज के घर के पास जाकर आवाज़ दिया

सूरज ये भाई सूरज देख देख में क्या लेकर आया हूं

सूरज ने कहा आरे ये तो मिट्ठी की हाँडी हैं इसको किसलिए लाए हो ?

गोपाल ने कहा आरे दोस्त ये कोई मामूली हाँडी नहीं हैं

ये तो जादुई हाँडी हैं सूरज ने पूछा कैसा जादू की हाँडी ?

गोपाल ने कहा इस हाँडी से में जो चीज भी खाने के लिए मा-गूंगा ये हाँडी मुझे वह सब दे देगा

तुझे देखना हैं तो ये देख कहते हुए

गोपाल ने हाँडी से कहा ये हाँडी मुझे लड्डू और गुलाबजमुन और रसगुल्ला दे,

इतना कहने पर हाँडी से तुरंत लड्डू और गुलाबजमुन और रसगुल्ला निकाल आया

ये सब देख कर सूरज की नीयत खराब हो गया और वो सोचा की

इस जादू की हाँडी को गोपाल से चुराना होगा – Bhooto Ki Kahani

तब उनके दिमाग में एक आयडियाा आया सूरज ने गोपाल से कहाआरेे भाई गोपाल इतने धूप में बाहर क्यों खड़े हो घर पर चल और थोड़ा देर आराम कर,

बाद में घर पर जाना फिर दोनों घर के अंदर गया फिर सूरज ने गोपाल को पीने के लिए पानी दिया और कहा थोड़ी देर के लिए

आराम कर लो धूप में तुम एक दम थक गई हो गोपाल ने कहा ठीक हैं

और चारपाई पर लेट गया और सूरज उसको हवा करने लगा कुछ देर में गोपाल को नींद अगिया

सूरज ने देखा गोपाल को नींद आ-गया हैं तो उसने तुरंत जादू की हाँडी को चुरा लिया और हाँडी के जगह पर दूसरा हाँडी राख दिया

फिर जब गोपाल की आंख खुली तो वो घर जाने के लिए सूरज से कहा चलो बहुत देर हो चुका हैं

अब मुझे घर जाना चाहिए मा मेरे लिए इंतजार कर रहा होगा सूरज ने कहा ठीक हैं

गोपाल वहा से निकाल कर अपने घर में गया और घर में जाकर

अपने मा से कहा मा अब हमें कुछ करने की जरूरत नहीं हैं

अब से हम जो कुछ भी खाना चाहे वो इस हाँडी से मिल जायेगा

मा ने कहा बेटा कैसा पागल जैसा बात कर रहे हो खाली हाँडी से कभी कुछ निकला हैं

गोपाल ने कहा मा ये कोई मामूली हाँडी नहीं हैं ये तो

जादू की हाँडी हैं में अभी आपको इसका कमल दिखाता हूं

ये कह कर गोपाल हाँडी की जादू दिखाने लगा लेकिन बर बर

कोशिश करने पर भी जादू के हाँडी से कोई भी चीज नहीं निकाल रहा था

क्योंकि जादू की हाँडी तो सूरज ने चोरी कर लिया था

बर बर कोशिश करने पर मा ने कहा बेटा तुम्हारी दिमाग तो ठीक हैं ? गोपाल ने सोचा

उन पांचों भूत ने उनको उल्-लो बनाया कल सुबह उनको सबक सिखाता हूं

सुबह होने पर गोपाल फिर से उन पेड़ के पास जाकर कहा-

“एक को खाएंगे दूसरे को खाएंगे चुन चुन कर पांच को खाएंगे – एक को खाएंगे दूसरे को खाएंगे चुन चुन कर पांच को खाएंगे”

ये बात सुनकर सभी भूत फिर से डार गया और कहा मालिक आप हमें मत खाए हम आपको एक तोहफ़ा देते हैं उस-को लीजिए और हमें बक्स दीजिए

भूत ने उनेह एक जादू की बकरा दिया गोपाल बकरा को देख कर बोला आरे में इस बकरा को लेकर क्या करू ?

ऐसा बकरा तो मेरे घर पर पहले से ही हैं भूत ने कहा मालिक ये कोई मामूली बकरा नहीं हैं ये तो जादू की बकरा हैं

आप जब भी इसको गुदगुदी देंगे ये बकरा हसेगा और इनके मंह से सोना निकलेगा ये बात सुनकर गोपाल बकरा को गुदगुदी देने लगा

गुदगुदी देने पर बकरा के मुंह से सुना निकलते हुए देखा तो गोपाल बोहथ खुश हो गया और सोचा इतना जबरदस्त

जादू की बकरा सूरज को तो जरूर दिखाना पड़ेगा – चलो पहले सूरज की घर पर चलते हैं और उस-को दिखाते हैं,

दिखाने के बाद घर पर जाकर मां को भी दिखाएंगे

यह कहते हुए गोपाल सूरज की घर की तरफ जाने लगा जाते जाते सूरज की

घर पर पहुंचा घर के बाहर जाकर गोपाल आवाज देने लगा

सूरज आरे सूरज कहां हो तुम आह आओ जल्दी से आओ सुरेश को गोपाल की आवाज सुनकर डर लगने लगा

कहीं गोपाल को कल की चोरी के बारे में पता तो नहीं चला ?

फिर भी डरते डरते सूरज गोपाल के सामने आया

और आकर देखता हैं गोपाल के हाथ में एक बकरा हैं

सूरज गोपाल से पूछते हैं आरे गोपाल क्या बात हैं आज बकरा लेकर आए हो ?

गोपाल कहते हैं आरे सूरज यह कोई मामूली बकरा नहीं हैं

यह देख कहते हुए बकरा को गुदगुदी देने लगा और बकरा के मुंह से

सोने का मोहर निकालने लगा बकरा के मुंह से सोना निकलते हुए देख कर

सूरज ने सोचा कि इस बकरा को तो चोरी करना ही पड़ेगा

फिर उसके दिमाग में कल के जैसा ही आयडिया आया गोपाल से कहां

आरे भाई बाहर क्यों खड़े हो चलो चलो घर में चलो थोड़ा सा आराम कर लो

थोड़ी देर आराम करने की बाद घर पर चले जाना

गोपाल घर के अंदर गया और कल की तरह पानी पीकर

चारपाई पर लेट गया जब उस-को नींद आ गया तो

सूरज ने तुरंत मौका देखकर बकरा को चोरी करके उस बकरा की जगह पर – Bhooto Ki Kahani

दूसरे बकरा को रख दिया कुछ देर के बाद गोपाल उठ कर कहां चलो अब घर चलते हैं सूरज ने कहां ठीक हैं फिर आना

उसके बाद गोपाल घर पर जाने के लिए निक-ले जाते जाते गोपाल घर पहुंच गए और घर में जा-के मा से कहां मा देखो

मैं क्या लेकर आया हूं अब हम गरीब नहीं रहेंगे हमारे पास ढेर सारे पैसा होंगे मा ने कहा फिर से आज दिमाग खराब हो गया हैं तेरा

और तुम बकरा लेकर क्यों आए हो ? गोपाल ने कहा आरे मां यह कोई मामूली बकरा नहीं हैं यह तो जादुई बकरा हैं

इसको जब भी हम गुदगुदी देंगे यह हंसेगा और इसकी मुंह से सोने का मोहार निकलेगा में अभी तुम्हें दिखाता हूं

यह कहकर गोपाल बकरा को गुदगुदी देने लगा लेकिन

बार-बार कोशिश करने पर मोहर निकालने का कोई नाम निशानी नहीं मिला

उल्टा ज्यादा गुदगुदी देने पर बकरा को गुस्सा आ गया

और बकरा ने गोपाल को जार से धक्का मारा और भाग गया घर के बाहर

गोपाल ने सोचा कि अब तो भूतों की खैर नहीं फिर से मुझे उल्लू बनाया हैं

चलो कल सुबह उनको सबक सिखाएंगे फिर दूसरे दिन नारियल के पेड़ के पास पहुंचा

और कहने लगा एक को खाएंगे दूसरे को खाएंगे

चुन चुन कर पांचों को खाएंगे –

एक को खाएंगे दूसरे को खाएंगे चुन-चुन कर पांचों को खाएंगे – Bhooto Ki Kahani

ये बात सुनकर भूतों ने सोचा आरे भाई यह क्या मुसीबत हैं यह तो हमें खाली खाने का ही बात कर रहा हैं

चलो चलो देखते हैं क्या हुआ हैं और गोपाल के पास आकर भूतों ने कहा मालिक क्या बात हैं आप नाराज क्यों हो गए हैं

गोपाल ने कहा तुम मुझे रोज रोज बेवकूफ बना रहे हो कभी फालतू की हाँडी दे देते हो कभी फालतू के बकरा दे देते हो

और घर में जाने पर ये सब कुछ काम ही नहीं करता हैं ये बात सुनकर भूतों ने सोचा कि आखिर क्या वजह हैं

उनके दिए हुए हाँडी और बकरा की तो कोई कमी नहीं हैं, उससे तो हर रोज सोना और खाने पीने की चीज तो निकालने वाला हैं

लेकिन कैसे काम नहीं कर रहा होगा एक भूत ने गोपाल से पूछा आरे मालिक आपको हम जब उपहार देते हैं तो आप उपहार को लेकर

सीधा घर पर जाते हैं या कहीं और जाते हैं गोपाल ने कहा मैं अपने दोस्त के पास जाता हूं ये सुनकर भूत ने कहा

अब समझा कि हमारी हाँडी और बकरा क्यों काम नहीं कर रहा हैं गोपाल ने कहां क्या मतलब ?

भूतों ने कहा कि आपको हम जो उपहार देते थे वह आपके दोस्त ने चोरी कर लिए हैं

यह बात सुनकर गोपाल को गुस्सा आया कि मेरा दोस्त ऐसा नहीं सकता हैं भूतों ने कहा

आपको हम एक तोहफ़ा और देते हैं इसको लेकर आप अपने दोस्त के पास जाए

फिर देखिए वह कैसे आपके हाँडी और बकरी लेकर आते हैं फिर

भूतों ने उन्हें एक लाठी दिया – Bhooto Ki Kahani

और कहां आप इस लाठी को लेकर आपके दोस्त के घर पर जाए और उस दोस्त को आवाज देकर बुलाया और लाठी को कहिए

लाठी अपना कमाल दिखा फिर देखिए लाठी का क्या कमाल हैं

और जब आपको लाठी को रोकना पड़े तो बोलिए गा कि यह लाठी रुक जा लाठी रुक जाएगा

गोपाल को तो बहुत ज्यादा गुस्सा आ गया कि मेरा दोस्त ऐसा मेरे साथ कैसे कर सकता हैं

गुस्से से अपने दोस्त के घर पर गया जाकर आवाज़ दिया ये सूरज. सूरज गोपाल की आवाज सुनकर उसे लगा

आज भी कुछ अच्छा चीज मिलने वाले हैं वह खुश होकर घर के बाहर आया और देखा गोपाल की हाथ में एक लाठी हैं

सूरज ने कहां हैं रे भाई यह क्या हैं गोपाल बोला अभी दिखाता हूं और लाठी को कहा लाठी अपना कमाल दिखा

जादुई लाठी सीधे जाकर सूरज के पीठ पर जोर जोर से मारने लगा इतना मारा इतना मारा के सूरज का हाल खराब हो गया

गोपाल ने कहा मेरा हंडी वापस दे मेरा बकरा वापस दे नहीं तो तेरा हाल आज बहुत खराब होने वाला हैं सूरज ने कहा

हां हां दे देता हूं भाई मुझे माफ कर दे मेंने सब चोरी कर लिया था मुझे माफ कर दे फिर गोपाल ने लाठी को कहां

यह लाठी रुक जा लाठी रुक गया सूरज ने तुरंत अपने घर से वह जादू की हाँडी

और जादू की बकरी लेकर आया और गोपाल को दे दिया

गोपाल लाठी और बकरी और हाँडी को घर पर लेकर गया

जाकर अपने मां को जादू के हाँडी और जादू के बकरा की कमाल दिखाने लगा

गोपाल ने bhooto के दिया हुआ हाँडी से बहुत सारे खाने की चीज और जादू की

बकरी से बहुत सारे सोने की मोहर निकाल कर मा को दिखाई

गोपाल की मा ये सब कुछ देख कर हैरान हो गया

और दोनों पेट भर कर बहुत सारे चीज खाया

और जादू की बकरी से बहुत सारे सोने की सिक्के निकाला

कुछ दिन में वो बहुत सारे पैसे के मालिक बन गया हैं उसके बाद क्या हुआ

दोस्तों 5 Bhooto Ki Kahani आपको कैसा लगा हमें कॉमेंट कर जरूर बताएं

और 5 भूतों की कहानी के आग-ला पार्ट भी हम जरूर लाएं-गे

अगर आप ज्यादा कॉमेंट करते हो तो

इस तरह की Hindi Kahaniya के लिए www.newstorylife.com के साथ बने रहे

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top