kankal bhoot कंकाल भूत की कहानी

Kankal Bhoot कंकाल भूत की कहानी | horror story in hindi | [2020]

Kankal Bhoot कंकाल भूत की की कहानी bhutiya kahani इस पोस्ट में आपको एक कंकाल की कहानी बताने वाला हूं जोकि आपको बहुत पसंद आने वाले हैं तो चलिए जानते हैं Kankal Bhoot Ki Kahani

मुझे कुछ समय के लिए मेडिकली मौका मिला, वहां मुझे कंकाल चाहिए था,
इसलिए मैंने एक कंकाल लाने के बारे में सोचा,
और मैंने अपने माता-पिता को बताया कि मुझे एक कंकाल की आवश्यकता है,
और मैं उस कंकाल को घर ले आऊंगा।

Horror story in Hindi
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लेकिन माता-पिता सहमत नहीं हुआ, कुछ दिन ऐसे ही बीते,
और कुछ समय बाद मेरे माता-पिता को लगा कि मुझे अध्ययन करने की आवश्यकता है,

इसलिए मेरे माता-पिता ने मुझे एक कंकाल लाने की अनुमति दे दी।
लेकिन माता-पिता को भूत-प्रेम से बहुत डर लगता था
इसलिए मैं इसे पहले नहीं लाने वाला था।

लेकिन मेरे माता-पिता सहमत हो गए हैं, सब ठीक हो गया
इसलिए अगले ही दिन मैं एक कंकाल घर ले आया।
नया कंकाल लंबा नहीं था, इसलिए मैंने कंकाल लिया और
अपने कमरे में अपनी अल-मारी के अंदर रख दिया।

पहले तो कुछ दिन अच्छी तरह बीते थे, ऐसे में एक सुबह घर में सब लोग बैठकर चाय पी रहे थे,
मेरा एक बड़ा परिवार था, और मेरे चाचा और मैं घर पर साथ में ही रहता था,
मेरे चाचा एक महान डॉक्टर था इसलिए मैं उनसे बहुत प्रेरित था।

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एक दिन सुबह घर में भूतों के बारे में बहुत सारे कहानियाँ पर बात चल रही थीं,
हर कोई एक भूत की कहानी बता रहा था, और मैं उन सबकी बातें गौर से सुन रहा था,
लेकिन मैं एक मेडिकल छात्र था इसलिए मुझे इन बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था।

अचानक हमारे घर में काम करने वाला रामू काका यह कहने लगे कि
उनके गाँव में एक कंकाल की घटना हुई थे, मैं रामू काका की कहानी सुनने को बहुत उत्साहित था,
मैंने पहले भी कंकालों के बारे में कई कहानियां सुने थे।

रामू काका ने कहा कि उनके गांव में एक कंकाल भूत कभी-कभी सभी को डराता हैं।
मेरे कुछ दोस्त भी मुझे कभी कभी कंकाल भूत के बारे में बहुत डराते हैं।

और छोटी उम्र से ही मुझे भूतों के बारे में कहानियां सुनने का बहुत शौक रहता था।
जब में छोटा था तब से ही मुझे भूत की कहानी सुनना पसंद था,
मैं दीदा से बहुत सारी कहानियाँ सूना करता था।

दिदा की सभी कहानियाँ मुझे सच लगती थीं और बहुत पसंद भी आती थी,
लेकिन पिताजी कहते थे कि वे सभी कहानियाँ झूठी हैं।
फिर जैसे-जैसे मैं बड़ी होती गई मुझे एहसास हुआ
कि उन सभी कहानियाँ झूठी थीं।

दीदा का निधन बहुत पहले हो गया था, लेकिन मैं कभी-कभार दीदा को देखता हूं,
लेकिन एक मेडिकल छात्र के रूप में, मैंने इन चीजों को मनकी गलती मानते रहा,
मैंने अपने माता-पिता को इस बारे में सब कुछ बताया,

और माता-पिता ने फैसला किया कि हमारे गाँव के मंदिर की पुजारी से अपने घर पर पूजा करेगा,
पुजारी घर में आया और उसने कहा कि दीदा की आत्मा इस घर के चारों ओर घूमती रहती हैं।
माता-पिता इन सभी शब्दों में विश्वास करते हुए,

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मृत आत्माओं की शांति के लिए घर में पूजा कराया, उसके बाद कुछ दिन अच्छी तरह बीते थे,
ओर मेरा अध्ययन बहुत अच्छा चल रहा था, लेकिन एक दिन रात मैं अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था
और मुझे ऐसा लगा कि कोई मेरे बगल में कोई लेटा हुआ है।

और मैं नींद से उठा और मेरी घर की चारों तरफ़ देखा तो कोई नहीं था,
ऐसे ही सोच सोच कर मुझे नींद आ गया और मैं सो गया,
अगली सुबह मैंने सभी को सारी बातें बताईं।

और जैसे ही मैं अगली रात फिर से सो गया, मुझे लगा जैसे कोई मेरे सिर के वाल को हिला रहा है,
मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरी माँ मेरे सिर पर हाथ रगड़ रही है,
लेकिन मैं जैसे ही आंखे खोल कर देखता हूं तो वहां कोई नहीं था।

मैं उठा और अपनी माँ के पास गया और उन्हें सारी बात बताई,
और उस रात मैं अपनी माँ के पास सो गया था।
कई दिन और ऐसा कुछ नहीं हुआ।

मुझे लगा कि मेरे दिमाग में सब कुछ गलत चल रहा है। तो मैं फिर से बिस्तर पर चला गया।
और सो गया रात करीब 2 बजे, मेरे पास से किसी की
आवाज़ सुनाई दिया के कैसे हो ये सुन कर मुझे
लगा कि मेरे दीदा मुझे बुला रहे हैं।

मैं बहुत डर गया था और मैं बेहोश हो गया। अगली सुबह जब मैं उठा तो मैंने खुद को बरामदे में पड़ा पाया,
और मेरे परिवार के सभी लोग मेरे आसपास खड़े थे, और घर वाले सब पूछने लगी कि
रात में क्या हुआ तुम बेहोश कैसे हो गए, तो मैं उन्हें सब कुछ बताया ।

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रात की सब बात सुनकर सभी डर गए थे, कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा
और रात में वो कंकाल हमें डरता था और ऐसा लगता था कि कंकाल की अंदर देदा की आत्मा छुपी हुई है,
घर वाले ने फैसला किया के उस कंकाल को किसी दूसरे जगह पर ले जाकर मिट्टी में दफ़ना देगा,

फिर उस कंकाल को के जाकर दफ़ना दिया उसके बाद माँ ने कहा कि एक बार फिर से घर पर पूजा करनी चाहिए,
पिताजी के एक मुस्लिम मित्र थे पिताजी ने उसे सारी घटनाएँ बताया,
सारे बाते सुनकर पिताजी के मित्र ने पिता से कहा कि उनके गाँव में

एक मौलाना रहता हैं जोकि भूत प्रेत को भागने में बहुत माहिर हैं
उनके पास दूर दूर से लोग आते हैं भूत प्रेत को भगाने के लिए,
उनके बारे में सुनने के बाद सब उनके पास जाने का
फैसला क्या और अगले दिन

पिताजी और उनके मित्र मौलाना से मिलने के लिए रवाना हो गए, वहां जाकर मेरे पिता ने मौलाना साहब को
सारी बात बताई, मौलाना सभी बातों को सुनने के बाद बताया कि एक आत्मा हमारे घर में है
जोकि कंकाल में प्रवेश कर उन्हें डराती है,

उसके बाद पिताजी मौलाना साहब को लेकर हमारे घर आए, फिर

मौलाना साहब ने घर की बंदिश कर दिया,

और एक बोतल पानी में कुछ पढ़ कर दम कर दिया,
पानी को रोज सुबह 40 दिन तक घर की चारों तरफ छिटकने के लिए बोला,

और कहां के ऐसा करो वो भूत अब इस घर पर कभी नहीं आएगा और नाही किसी को सताएगा,
उसके बाद से 3-4 साल हो चुके हैं घर पर सभी बहुत अच्छा और खुश हैं
अब पहले जैसी कोई घटनाएँ दोबारा नहीं घटी

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